वो शायरी की महफ़िल ही क्या जिसमे दिल जल कर खाक ना हो
मज़ा तो तब आता है चाहत का दोस्तों जब दिल तो जले पर राख ना हो.
वो शायरी की महफ़िल ही क्या जिसमे दिल जल कर खाक ना हो
मज़ा तो तब आता है चाहत का दोस्तों जब दिल तो जले पर राख ना हो.
Author:Kaushal Gajjar
Email:kgajjar20@gmail.com
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